Legendary journalist Sanjeev Srivastava opens a Kachori shop in Jaipur

पत्रकारिता के ‘शिखर’ से जयपुर की ‘कड़ाही’ तक संजीव श्रीवास्तव का चौंकाने वाला सफर

Where is Sanjeev Srivastava BBC Journalist: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जिस शख्स ने दशकों तक दुनिया के सबसे बड़े मीडिया संस्थान BBC (इंडिया) की कमान संभाली हो, जिसने बड़े-बड़े प्रधानमंत्रियों और हस्तियों के इंटरव्यू लिए हों, वो आज जयपुर की एक दुकान पर कचौड़ी तलते हुए मिल सकता है?

जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि कड़वा सच और एक बेहद प्रेरणादायक हकीकत है। वरिष्ठ पत्रकार संजीव श्रीवास्तव (Sanjeev Srivastava BBC Journalist:), जो कभी भारतीय पत्रकारिता के सबसे रसूखदार चेहरों में से एक थे, उन्होंने अब जयपुर के वैशाली नगर में अपनी एक कचौड़ी की दुकान खोल ली है।

इस खबर ने न केवल मीडिया जगत को हैरान कर दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों एक दिग्गज पत्रकार ने ‘माइक’ छोड़ ‘कलछी’ थाम ली?

पत्रकारिता का वो ‘सूरज’ जो अब जयपुर की गलियों में चमक रहा है

संजीव श्रीवास्तव का नाम पत्रकारिता की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे BBC के पहले गैर-ब्रिटिश इंडिया हेड (India Head) बने और लगभग एक दशक तक इस पद पर रहे। चार दशकों के अपने शानदार करियर में उन्होंने BBC के अलावा सहारा समय और राजस्थान पत्रिका जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।

लेकिन, जीवन की शाम में उन्होंने एक ऐसा रास्ता चुना जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आज वे जयपुर के वैशाली नगर में अपनी कचौड़ी की दुकान पर ग्राहकों को गर्म-गर्म कचौड़ी परोस रहे हैं।

क्यों बदला करियर? “काम में सम्मान है, पद में नहीं”

जब उनसे इस हैरान कर देने वाले बदलाव के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब किसी को भी प्रेरित कर सकता है। संजीव श्रीवास्तव का मानना है कि “सम्मान आपके काम से आता है, न कि आपके पद से।”

उन्होंने बताया कि लगभग 40 साल तक मीडिया में रहने के बाद वे कुछ ऐसा करना चाहते थे जो उन्हें जमीन से जोड़कर रखे। यह दुकान केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि उनकी उद्यमिता (Entrepreneurship) की एक नई पारी है। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता ने मुझे बहुत कुछ दिया, अब समय था कि मैं अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को पूरा करूँ और कुछ ऐसा करूँ जो मुझे संतुष्टि दे।”

6 महीने की मेहनत और नया स्टार्टअप

एक पत्रकार के लिए कचौड़ी की दुकान खोलना इतना आसान नहीं था। संजीव बताते हैं कि इस दुकान की री-मॉडलिंग और तैयारियों में उन्हें लगभग 6 महीने का समय लगा। इस दौरान कई कानूनी और तकनीकी जटिलताएं भी आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनकी यह दुकान न केवल स्वादिष्ट कचौड़ी बेच रही है, बल्कि यह एक मिसाल बन गई है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता।

क्या पत्रकारिता को अलविदा कह दिया?

Sanjeev Srivastava BBC Journalist
Sanjeev Srivastava BBC Journalist surprises Media world by opening a Kachori shop in Jaipur

संजीव श्रीवास्तव के प्रशंसकों के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि उन्होंने भले ही कचौड़ी की दुकान खोल ली हो, लेकिन उनकी पैनी पत्रकारिता जारी रहेगी। वे अभी भी विभिन्न टीवी चैनलों और अखबारों में अपने स्वतंत्र विश्लेषण (Analysis) और धारदार टिप्पणियों के साथ नजर आएंगे। उनका कहना है कि उनकी वैचारिक सक्रियता कभी कम नहीं होगी।

युवाओं के लिए एक बड़ा सबक: ‘लकीर के फकीर’ मत बनो

आज के दौर में जब युवा केवल कॉर्पोरेट नौकरी और ऊंचे पदों के पीछे भागते हैं, संजीव श्रीवास्तव का यह कदम एक बड़ी सीख देता है। उनका यह फैसला बताता है कि:

  1. पैशन (Passion) का कोई अंत नहीं होता: आप किसी भी उम्र में नई शुरुआत कर सकते हैं।
  2. पद नहीं, हुनर मायने रखता है: एक पूर्व ‘इंडिया हेड’ का दुकान पर बैठना इस बात का प्रमाण है कि इंसान की पहचान उसके अहंकार से नहीं, उसके कर्म से होती है।
  3. करियर में बदलाव से डरो मत: दुनिया क्या कहेगी, इससे ऊपर उठकर अपनी खुशी के लिए काम करना ही असली सफलता है।

सोशल मीडिया पर मिली तारीफों की झड़ी

संजीव श्रीवास्तव का यह वीडियो और खबर वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनकी सादगी और हिम्मत की दाद दे रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जहाँ लोग रिटायरमेंट के बाद गुमनामी में चले जाते हैं, वहीं संजीव ने खुद को एक ‘स्टार्टअप’ के जरिए पुनर्जीवित किया है।

संजीव श्रीवास्तव: पत्रकारिता के ‘भीष्म पितामह’ का सफर – Life Journey of Sanjeev Srivastava BBC Journalist

संजीव श्रीवास्तव का मीडिया करियर किसी सुनहरे इतिहास से कम नहीं है। उनकी पहचान केवल एक संपादक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे पत्रकार के रूप में रही है जिसने भारतीय पत्रकारिता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।

राजनीतिक गलियारों में पैठ:
दिल्ली की राजनीति हो या राजस्थान की सत्ता, संजीव श्रीवास्तव के विश्लेषण को सत्ता के गलियारों में बहुत गंभीरता से सुना जाता था। उन्होंने दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों और दिग्गजों के साक्षात्कार लिए, जो आज भी पत्रकारिता के छात्रों के लिए केस स्टडी हैं।

BBC का स्वर्णिम काल: संजीव श्रीवास्तव ने BBC (British Broadcasting Corporation) के साथ लगभग 16 वर्षों तक काम किया। वे BBC के इतिहास में पहले ऐसे भारतीय थे जिन्हें ‘India Editor’ के पद पर नियुक्त किया गया। उनके कार्यकाल के दौरान BBC हिंदी और अंग्रेजी की कवरेज ने भारत में विश्वसनीयता के नए कीर्तिमान स्थापित किए।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के उस्ताद: उन्होंने न केवल दफ्तर में बैठकर रणनीतियां बनाईं, बल्कि युद्ध क्षेत्रों, प्राकृतिक आपदाओं और देश के सबसे जटिल चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। उनकी आवाज़ रेडियो और टीवी पर एक भरोसे का प्रतीक मानी जाती थी।

बड़े संस्थानों का नेतृत्व: BBC के बाद, उन्होंने ‘सहारा समय’ (Sahara Samay) न्यूज़ नेटवर्क के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ के रूप में कार्यभार संभाला। इसके अलावा, वे ‘राजस्थान पत्रिका’ जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह के साथ भी वरिष्ठ पदों पर जुड़े रहे।

प्रेरणा का एक नया अध्याय

जयपुर की सड़कों पर अब सिर्फ कचौड़ी की खुशबू नहीं, बल्कि एक दिग्गज पत्रकार के संघर्ष और सादगी की महक भी बिखरी है। संजीव श्रीवास्तव ने साबित कर दिया है कि जीवन एक खुला कैनवास है, आप जब चाहें इसमें नया रंग भर सकते हैं।यदि आप जयपुर में हैं या जयपुर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो वैशाली नगर में संजीव जी की दुकान पर जाकर न केवल कचौड़ी का स्वाद लें, बल्कि उस इंसान से भी मिलें जिसने ‘स्टेटस’ की बेड़ियों को तोड़कर ‘संतुष्टि’ का रास्ता चुना है।

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