Karva Chauth Katha

Karwa Chauth History: भारतीय त्योहारों में से करवा चौथ एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है जो जिसे ज्यादातर भारत के उत्तरी हिस्से में मनाया जाता है। ये प्रेम विवाह और पति पत्नी के बीच ओके अटूट बंधन का प्रतीक भी है और उत्सव भी। करवा चौथ का इतिहास सदियों पुराना है। इस दिन भारतीय महिलाएं व्रत रखती है कुछ भी खाती पीती नहीं है और भगवान शिव की पूजा आराधना करती हैं।

इस प्रकार के वी प्रसाद भारतीय घरों में बनते हैं, और चन्द्रमा को देखने के बाद ही पत्नियां अपना उपवास तोड़ती हैं, जो की हिन्दु पौराणिक कथाओं के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय पिंडों में से एक है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। साथ ही वह भगवान शिव से उनके पति को किसी भी नुकसान या कठिनाइयों से बचाने के लिए भी आराधना करती हैं। उत्तर भारत में यह भी माना जाता है कि करवा चौथ वैवाहिक जीवन में शांति, खुशी और आनंद लाता है।

करवा चौथ से जुड़ी अनेकों कथाएँ

करवा चौथ के त्योहार से जुड़ी कई प्राचीन किंवदंतियां हैं। अधिकतर ये कहानियां महिलाओं के बलिदान का उल्लेख करती हैं। यह प्राचीन कथाएँ उन महिलाओं के शुद्ध और शाश्वत प्रेम की परिचायक हैं।

Karwa Chauth History: Picture courtesy: Instagram/sawadhee_spa

करवा चौथ की सबसे प्रचलित कथा (Karwa Chauth History) : वीरवती की कथा (Veervati Story in Hindi)

ऐसी एक कथा जो कि सबसे अधिकि प्रचलित है वह है वीरवती की। कथा के अनुसार वीरवती एक सुंदर रानी थी। उसके सात भाई थे और वीरवती का विवाह एक रूपवान और पराक्रमी राजा से हुआ था। अपनी शादी के पहले वर्ष के दौरान, वेरावती ने सख्त उपवास करके अपना पहला करवा चौथ मनाया।

वीरवती की बेचैनी भाई देख नहीं पाए

Karwa Chauth History
Veeravati offering prayers

जैसे-जैसे रात गहराई, वीरवती को तेज प्यास और भूख लगने लगी और वो बेचैनी होने लगी। अपने संकल्प अनुसार उसने कुछ भी खाने-पीने से मना कर दिया। कुछ और देर बीतने के बाद वीरवती के भाई उसकी हालत और पीड़ा नहीं देख पा रहे थे। इस कारण उन भाइयों ने इसके बारे में कुछ करने का फैसला किया।

भाइयों का स्नेह था या षड्यंत्र

भाइयों ने बहुत सोचा तो एक उपाय उन्हें सूझा। उन्होंने अपने ग़र के पिछवाड़े में पीपल के पेड़ के साथ एक दर्पण बनाया  और टांग दिया। इसके उपरांत उन भाइयों ने वीरवती को यह विश्वास डेलाने की कोशिश की कि चंद्रमा अब उग आया है और उसे अपना उपवास तोड़ देना चाहिए। स्वाभाविक रूप से उसने उन पर विश्वास कर लिया और अनंत श्रद्धा से रखा अपना उपवास तोड़ा। 

फिर जो हुआ उससे वीरवती का जीवन उजाड़ गया

दुर्भाग्य से उपवास तोड़ने के तुरंत बाद खबर आई कि वीरवती प्यारे पति की मृत्यु हो गई है। वीरवती पूरी इस समाचार को सुनकर अपने होश लहो बैठी। उसे लग रहा है जैसे कि उसका जीवन अब समाप्त हो गया है पर अब जी कर भी क्या करेगी। लेकिन एक तरफ उसको अभी भी विश्वास नहीं आ रहा था। वह घबराकर अपने पति के घर की ओर भागने लगी। 

रास्ते मेनवीरवती को कौन मिला

वो परेशान, हताश भाग रही थी कि रास्ते में उसे भगवान शिव और माँ पार्वती मिले। भगवान शिव और पार्वती ने उसका रास्ता रोका। वीरावती को उन्होंने बताया कि कैसे उसके भाइयों ने उसे बरगलाया है और झूठ बोलकर उसका व्रत तुड़वा दिया।  इसके बाद जो हुआ वो अत्यंत विचित्र था। माँ पार्वती ने अपनी उंगली काटी और वीरवती को अपने पवित्र रक्त की कुछ बूँदें दीं।

माँ पार्वती के निर्देश

माँ पार्वती ने वीरवती को कुछ निर्देश दिए और कहा कि वो अपने अगले उपवास के दौरान अत्यधिक सावधान रहे। माँ पार्वती की दिशा अनुसार, वीरवती ने अपने पति के मृत शरीर पर पवित्र रक्त छिड़का। चमत्कारिक रूप से उसके पति दोबारा से जीवित हो उठे। इस प्रकार, वीरवती अपने अपार प्रेम, त्याग और भक्ति के कारण अपने पति के साथ फिर से मिल गई।

करवा चौथ और आधुनिक जीवन

यह करवाचौथ की कथा सबसे प्रचलित है और आज भी सुनाई जाती है। बदलते वक्त बदलते वक्त के साथ करवाचौथ का स्वरूप ही बदल रहा है। इस आधुनिक युग में मान्यताएँ भी बदल रहीं हैं। संयोगवश भारत में अभी भी धर्म अध्यात्म और त्योहारों की महता बरकरार है, आज भी पति पत्नी के रिश्ते का अधिल पश्चिमीकरण नहीं हुआ है। आने वाले समय में इस त्यौहार को मनाने के तरीके जरूर बदल जाएंगे लेकिन आशा है कि करवाचौथ को एक पति पत्नी के बीच में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में सदैव मनाया जायेगा।

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