AR Rehman Rabbi Shergill

ए आर रहमान : भारतीय फ़िल्म संगीत में एक नए युग की आहट या पतन?

AR Rehman Rabbi Shergill Controversy: भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में ए.आर. रहमान (AR Rahman) एक ऐसा नाम है जिसने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी धुनों का लोहा मनवाया है। ‘रोजा’ से लेकर ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ तक, रहमान का सफर एक प्रेरणा रहा है। लेकिन हाल ही में ‘बुल्ला की जाणा’ फेम गायक रब्बी शेरगिल (Rabbi Shergill) के एक बयान ने बॉलीवुड और संगीत प्रेमियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

रब्बी शेरगिल का कहना है कि ए.आर. रहमान के आने के बाद बॉलीवुड में हिंदी और उर्दू शायरी (Lyrics) की अहमियत कम हो गई और संगीत यानी ‘साउंड’ मुख्य भूमिका में आ गया। इस लेख में हम इसी विवाद, ए.आर. रहमान के हिंदी ज्ञान और बॉलीवुड संगीत के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

रब्बी शेरगिल का बयान: “रहमान हिंदी नहीं जानते”

रब्बी शेरगिल, जो अपनी सूफी गायकी और अर्थपूर्ण गीतों के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ए.आर. रहमान के साथ अपने काम करने के अनुभव को साझा किया। रब्बी ने ‘जब तक है जान’ के गाने “छल्ला” (Challa) में रहमान के साथ काम किया था।

रब्बी का तर्क है कि:

  • हिंदी भाषा की समझ: रब्बी के अनुसार, ए.आर. रहमान हिंदी या उर्दू की बारीकियों को उस तरह नहीं समझते जैसे पुराने दौर के संगीतकार (जैसे नौशाद या मदन मोहन) समझते थे।
  • शायरी का गौण होना: रब्बी ने कहा कि रहमान के दौर में ‘लिरिक्स’ यानी शब्दों का स्थान ‘सेकेंडरी’ (द्वितीयक) हो गया। अब संगीत निर्देशक शब्दों के अर्थ से ज्यादा ध्वनि (Sound) और रिदम पर ध्यान देते हैं।
  • बॉलीवुड का बदलाव: रब्बी के मुताबिक, पहले गाना शब्दों के इर्द-गिर्द बुना जाता था, लेकिन रहमान ने धुनों को केंद्र में लाकर बोलों को पीछे धकेल दिया।

ए.आर. रहमान और हिंदी: अपमान से सीखने तक का सफर

यह पहली बार नहीं है जब रहमान की हिंदी पर सवाल उठे हों। खुद रहमान ने एक बार स्वीकार किया था कि करियर की शुरुआत में उन्हें हिंदी न आने की वजह से ‘अपमान’ महसूस होता था।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • डबिंग का दर्द: रहमान ने बताया था कि ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ जैसी फिल्मों के तमिल गानों का जब हिंदी में शाब्दिक अनुवाद (Literal Translation) किया गया, तो वे शब्द बहुत अजीब लगते थे। लोग उनका मजाक उड़ाते थे कि “ये हिंदी लिरिक्स बहुत खराब हैं।”
  • सुभाष घई की सलाह: फिल्म ‘ताल’ के दौरान सुभाष घई ने उन्हें सलाह दी थी कि यदि उन्हें बॉलीवुड में लंबे समय तक टिकना है, तो उन्हें हिंदी और उर्दू सीखनी ही होगी।
  • सीखने का जज्बा: इस सलाह को गंभीरता से लेते हुए रहमान ने हिंदी और उर्दू सीखी। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कुरान पढ़ने के लिए उन्होंने अरबी भी सीखी ताकि शब्दों के उच्चारण और उनके पीछे की भावना को समझ सकें।

पहले भी लगें है रहमान पर लिरिक्स को लेकर अपमानजनक आरोप

ऐसा नहीं है कि रहमान पर इससे पहले इस तरह के आरोप नहीं लगे हैं। हिंदी भाषा में उनकी लिरिक्स के बारे में ज्ञान को लेकर वह अक्सर चर्चाओं में रहे हैं और बहुत बार उन्होंने अपने चाहने वालों को निराश भी किया है। रहमान पर लिरिक्स की समझ ना होने के साथ-साथ कई बार धुने चोरी करने के भी आरोप लगे हैं।

हालांकि जय हो के गीत के लिए रहमान को ऑस्कर से नवाज़ा गया है लेकिन उन पर धुने चोरी करने के आप शुरुआत से ही लगता चले आए हैं। चाहें उनके बेहद चर्चित गीत ‘मुकाबला’ हो, ‘हम्मा हम्मा हो या फिर ऑस्कर जीतने वाला ‘जय हो’ भी हो इस सभी गीतों पर रहमान पर धुन चोरी करने का आरोप लगे हैं जो बहुत बार सही भी साबित हुए हैं। 

बॉलीवुड संगीत का विकास: शब्दों से साउंड तक

बॉलीवुड संगीत के ‘स्वर्ण युग’ (1950-70) में साहिर लुधियानवी, मजरूह सुल्तानपुरी और कैफी आजमी जैसे कवियों का बोलबाला था। उस समय संगीतकार पहले कविता पढ़ते थे और फिर धुन बनाते थे। आनंद बख्शी, अनजान, गुलज़ार और जावेद अख़्तर कुछ नया लेकर आये मगर इन गीतकारों के साथ साथ उस दौर के संगीतकारों की भी गीत के बोलों पर अच्छी पकड़ थी और उसे समझते थे।

रहमान ने क्या बदला?

  1. तकनीक का समावेश: रहमान ने भारतीय संगीत में सिंथेसाइज़र और इलेक्ट्रॉनिक ध्वनियों का परिचय कराया।
  2. ग्लोबल साउंड: उन्होंने बॉलीवुड को एक ऐसा साउंड दिया जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुना जा सके।
  3. बोलों का प्रभाव: हालांकि रहमान ने ‘रॉकस्टार’ (इरशाद कामिल) और ‘लगाना’ (जावेद अख्तर) जैसी फिल्मों में बेहतरीन बोलों का साथ दिया, लेकिन आलोचकों का मानना है कि उनकी धुनों की भव्यता में अक्सर शब्द खो जाते हैं।

हालिया विवाद: ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणी और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

हाल ही में रहमान एक और विवाद में घिरे जब उन्होंने कहा कि पिछले 8 वर्षों में बॉलीवुड में काम करने का तरीका बदल गया है और शायद ‘सांप्रदायिक’ (Communal) सोच की वजह से उन्हें कम काम मिल रहा है।

रब्बी शेरगिल और ए.आर. रहमान कर चुके हैं साथ काम – AR Rehman Rabbi Shergill Worked Together

AR Rehman Rabbi Shergill Controversy Shahrukh Khan starrer Jab Tak Hai Jaan
AR Rehman Rabbi Shergill collaborated for Shahrukh Khan starrer Jab Tak Hai Jaan

दिलचस्प बात यह है कि रब्बी शेरगिल और ए.आर. रहमान पहले भी यश चोपड़ा की आखिरी निर्देशित फिल्म ‘जब तक है जान’ में एक साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा की इस फिल्म के एक बेहद लोकप्रिय गाने के लिए हाथ मिलाया था। वह गाना था ‘छल्ला’, जो 2012 में फिल्म की रिलीज के समय युवाओं के बीच जबरदस्त हिट रहा था।

इतनी सफल साझेदारी के बाद रब्बी शेरगिल की ओर से ऐसी टिप्पणी आना काफी अजीब लगता है। हालांकि, रब्बी ने शायद सोच-समझकर ही यह बात कही होगी, क्योंकि वे बहुत कम बोलते हैं, लेकिन जब भी बोलते हैं, तो अपनी बात बड़ी बेबाकी और स्पष्टता से रखते हैं।

इंडस्ट्री के रिएक्शन – Bollywood’s reaction on AR Rehman Rabbi Shergill Fight:

  • अनुप जलोटा: भजन सम्राट अनुप जलोटा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अगर रहमान को लगता है कि मुस्लिम होने के कारण उन्हें काम नहीं मिल रहा, तो उन्हें फिर से हिंदू बन जाना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या बदलाव आता है।”
  • कंगना रनौत: कंगना ने रहमान के बयान को ‘नफरत भरा’ करार दिया।
  • समर्थन: हालांकि, इम्तियाज अली जैसे निर्देशकों ने रहमान का बचाव करते हुए कहा कि उनके शब्दों का गलत मतलब निकाला गया है। जावेद जाफ़री ने भी धीमे सुरों में रहमान का समर्थन किया लेकिन ज़्यादातर फ़िल्मी लोगों में इस पर चुप्पी साध कर ही रखी।

संगीत जगत की मशहूर हस्तियों के विचार (Quotes)

“संगीत हमेशा से भारत की संस्कृति को जोड़ने और उसका सम्मान करने का जरिया रहा है। मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के माध्यम से सेवा करना रहा है।”ए.आर. रहमान

“रहमान एक जीनियस हैं, लेकिन उनके आने के बाद बॉलीवुड ने अपनी भाषाई गहराई खो दी है। अब हम गानों को महसूस करने के बजाय सिर्फ उन पर झूमते हैं।”रब्बी शेरगिल

“शायरी फिल्म की आत्मा होती है। अगर संगीत शब्दों पर हावी हो जाए, तो वह गाना नहीं, सिर्फ एक शोर बन कर रह जाता है।”जावेद अख्तर (एक पुराने इंटरव्यू में)

क्या भाषा संगीत की मोहताज है?

ए.आर. रहमान और रब्बी शेरगिल (AR Rehman Rabbi Shergill )के बीच की यह वैचारिक जंग असल में ‘परंपरा बनाम आधुनिकता’ की लड़ाई है। जहाँ रब्बी जैसे कलाकार शब्दों की शुद्धता और अर्थ पर जोर देते हैं, वहीं रहमान ने संगीत को एक सार्वभौमिक भाषा (Universal Language) बना दिया है जिसे समझने के लिए किसी शब्दकोश की जरूरत नहीं होती।

बॉलीवुड संगीत आज एक चौराहे पर खड़ा है। क्या हमें वापस साहिर लुधियानवी के दौर की गहराई चाहिए, या रहमान के दौर का वह जादुई ‘साउंड’ जो सीमाओं को नहीं मानता? शायद जवाब इन दोनों के खूबसूरत मेल में ही छिपा है। आपका इस बारे में क्या विचार हैं हमसे ज़रूर संझा करें।

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